श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.7.3

एकादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

कुलं वै शापनिर्दग्धं नंक्ष्यत्यन्योन्यविग्रहात्।

समुद्रः सप्तमेऽह्न्येतां पुरीं च प्लावयिष्यति॥ ३✎ 2144

kulaṃ vai śāpanirdagdhaṃ naṃkṣyatyanyonyavigrahāt|

samudraḥ saptame'hnyetāṃ purīṃ ca plāvayiṣyati|| 3

अर्थ

अब यह यदुवंश, जो ब्राह्मणोंके शापसे भस्म हो चुका है, पारस्परिक फूट और युद्धसे नष्ट हो जायगा। आजके सातवें दिन समुद्र इस पुरी—द्वारकाको डुबो देगा॥ ३॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2144 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): मेऽह्नॺेतां → मेऽह्न्येतां

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