॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.7.69
अनुरूपानुकूला च यस्य मे पतिदेवता।
शून्ये गृहे मां सन्त्यज्य पुत्रैः स्वर्याति साधुभिः॥ ६९
anurūpānukūlā ca yasya me patidevatā|
śūnye gṛhe māṃ santyajya putraiḥ svaryāti sādhubhiḥ|| 69
अर्थ
हाय! मेरी प्राणप्यारी मुझे ही अपना इष्टदेव समझती थी; मेरी एक-एक बात मानती थी, मेरे इशारेपर नाचती थी, सब तरहसे मेरे योग्य थी। आज वह मुझे सूने घरमें छोड़कर हमारे सीधे-सादे निश्छल बच्चोंके साथ स्वर्ग सिधार रही है॥ ६९॥