भगवान् श्रीकृष्णने कहा—प्यारे उद्धव! गम्भीरबुद्धि अवधूत दत्तात्रेयने राजा यदुको इस प्रकार उपदेश किया। यदुने उनकी पूजा और वन्दना की, दत्तात्रेयजी उनसे अनुमति लेकर बड़ी प्रसन्नतासे इच्छानुसार पधार गये॥ ३२॥
इत्युक्त्वा स यदुं विप्रस्तमामन्त्र्य गभीरधीः।
वन्दितोऽभ्यर्थितो राज्ञा ययौ प्रीतो यथागतम्॥ ३२
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—प्यारे उद्धव! गम्भीरबुद्धि अवधूत दत्तात्रेयने राजा यदुको इस प्रकार उपदेश किया। यदुने उनकी पूजा और वन्दना की, दत्तात्रेयजी उनसे अनुमति लेकर बड़ी प्रसन्नतासे इच्छानुसार पधार गये॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.9.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 774) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/9/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)