श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.3.13

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

शौनक उवाच

इत्यभिव्याहृतं राजा निशम्य भरतर्षभः।

किमन्यत्पृष्टवान् भूयो वैयासकिमृषिं कविम्॥ १३

ityabhivyāhṛtaṃ rājā niśamya bharatarṣabhaḥ|

kimanyatpṛṣṭavān bhūyo vaiyāsakimṛṣiṃ kavim|| 13

अर्थ

शौनकजीने कहा—सूतजी! राजा परीक्षित‍्ने शुकदेवजीकी यह बात सुनकर उनसे और क्या पूछा? वे तो सर्वज्ञ होनेके साथ-ही-साथ मधुर वर्णन करनेमें भी बड़े निपुण थे॥ १३॥

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