श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.3.15

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

स वै भागवतो राजा पाण्डवेयो महारथः।

बालक्रीडनकैः क्रीडन् कृष्णक्रीडां य आददे॥ १५

sa vai bhāgavato rājā pāṇḍaveyo mahārathaḥ|

bālakrīḍanakaiḥ krīḍan kṛṣṇakrīḍāṃ ya ādade|| 15

अर्थ

पाण्डुनन्दन महारथी राजा परीक्षित् बड़े भगवद्भक्त थे। बाल्यावस्थामें खिलौनोंसे खेलते समय भी वे श्रीकृष्णलीलाका ही रस लेते थे॥ १५॥✎ 127 128

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #127 शब्दोंके बीचका स्थान: है।ये → है। ये
  • #128 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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