पाण्डुनन्दन महारथी राजा परीक्षित् बड़े भगवद्भक्त थे। बाल्यावस्थामें खिलौनोंसे खेलते समय भी वे श्रीकृष्णलीलाका ही रस लेते थे॥ १५॥✎ 127128
स वै भागवतो राजा पाण्डवेयो महारथः।
बालक्रीडनकैः क्रीडन् कृष्णक्रीडां य आददे॥ १५
पाण्डुनन्दन महारथी राजा परीक्षित् बड़े भगवद्भक्त थे। बाल्यावस्थामें खिलौनोंसे खेलते समय भी वे श्रीकृष्णलीलाका ही रस लेते थे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.3.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 194) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/3/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)