मुनिवर! आप वेद और ब्रह्मतत्त्व दोनोंके पूर्ण मर्मज्ञ हैं, इसलिये मेरे इस सन्देहका निवारण कीजिये॥ १०॥✎ 133
विचिकित्सितमेतन्मे ब्रवीतु भगवान् यथा।
शाब्दे ब्रह्मणि निष्णातः परस्मिंश्च भवान्खलु॥ १०
मुनिवर! आप वेद और ब्रह्मतत्त्व दोनोंके पूर्ण मर्मज्ञ हैं, इसलिये मेरे इस सन्देहका निवारण कीजिये॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.4.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 196) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/4/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)