श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.4.10

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

विचिकित्सितमेतन्मे ब्रवीतु भगवान् यथा।

शाब्दे ब्रह्मणि निष्णातः परस्मिंश्‍च भवान्खलु॥ १०

vicikitsitametanme bravītu bhagavān yathā|

śābde brahmaṇi niṣṇātaḥ parasmiṃśca bhavānkhalu|| 10

अर्थ

मुनिवर! आप वेद और ब्रह्मतत्त्व दोनोंके पूर्ण मर्मज्ञ हैं, इसलिये मेरे इस सन्देहका निवारण कीजिये॥ १०॥✎ 133

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #133 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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