तस्य मात्रा गुणः शब्दो लिङ्गं यद् द्रष्टृदृश्ययोः॥ २५
tāmasādapi bhūtādervikurvāṇādabhūnnabhaḥ|
tasya mātrā guṇaḥ śabdo liṅgaṃ yad draṣṭṛdṛśyayoḥ|| 25
अर्थ
जब पंचमहाभूतोंके कारणरूप तामस अहंकारमें विकार हुआ, तब उससे आकाशकी उत्पत्ति हुई। आकाशकी तन्मात्रा और गुण शब्द है। इस शब्दके द्वारा ही द्रष्टा और दृश्यका बोध होता है॥ २५॥✎ 137138
तामसादपि भूतादेर्विकुर्वाणादभून्नभः।
तस्य मात्रा गुणः शब्दो लिङ्गं यद् द्रष्टृदृश्ययोः॥ २५
जब पंचमहाभूतोंके कारणरूप तामस अहंकारमें विकार हुआ, तब उससे आकाशकी उत्पत्ति हुई। आकाशकी तन्मात्रा और गुण शब्द है। इस शब्दके द्वारा ही द्रष्टा और दृश्यका बोध होता है॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 201) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/5/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)