श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.6.11

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

धर्मस्य मम तुभ्यं च कुमाराणां भवस्य च।

विज्ञानस्य च सत्त्वस्य परस्यात्मा परायणम्॥ ११

dharmasya mama tubhyaṃ ca kumārāṇāṃ bhavasya ca|

vijñānasya ca sattvasya parasyātmā parāyaṇam|| 11

अर्थ

नारद! हम, तुम, धर्म, सनकादि, शंकर, विज्ञान और अन्तःकरण—सब-के-सब उनके चित्तके आश्रित हैं॥ ११॥✎ 1290 1291

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1290 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति, → निऋर्ऋति,
  • #1291 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति, → निर्ऋति,

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