॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 2.6.19
pādāstrayo bahiścāsannaprajānāṃ ya āśramāḥ|
antastrilokyāstvaparo gṛhamedho'bṛhadvrataḥ|| 19
अर्थ
जन, तप और सत्य—इन तीनों लोकोंमें ब्रह्मचारी, वानप्रस्थ एवं संन्यासी निवास करते हैं। दीर्घकालीन ब्रह्मचर्यसे रहित गृहस्थ भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोकके भीतर ही निवास करते हैं॥ १९॥✎ 1582
टिप्पणियाँ
- ३
प्रा० पा०—बहिस्त्वासन् प्रजानां त्रय आश्रमाः।
- ४
प्रा० पा०—महद्व्रतम्।