॥ श्रीहरिः ॥
ततश्च मनवः काले३ ईजिरे ऋषयोऽपरे।
पितरो विबुधा दैत्या मनुष्याः क्रतुभिर्विभुम्॥ २९
tataśca manavaḥ kāle ījire ṛṣayo'pare|
pitaro vibudhā daityā manuṣyāḥ kratubhirvibhum|| 29
अर्थ
इसके पश्चात् समय-समयपर मनु, ऋषि, पितर, देवता, दैत्य और मनुष्योंने यज्ञोंके द्वारा भगवान्की आराधना की॥ २९॥✎ 141 142
ततश्च मनवः काले ईजिरे ऋषयोऽपरे।
पितरो विबुधा दैत्या मनुष्याः क्रतुभिर्विभुम्॥ २९
इसके पश्चात् समय-समयपर मनु, ऋषि, पितर, देवता, दैत्य और मनुष्योंने यज्ञोंके द्वारा भगवान्की आराधना की॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.6.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 206) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/6/29/टिप्पणियाँ
- ३
प्रा० पा०—कालमीजिरे।
(मुद्रित पृष्ठ 206)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
- #141 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्से
- #142 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की