श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.6.5

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

केशश्मश्रुनखान्यस्य शिलालोहाभ्रविद्युताम्।

बाहवो लोकपालानां प्रायशः क्षेमकर्मणाम्॥ ५

keśaśmaśrunakhānyasya śilālohābhravidyutām|

bāhavo lokapālānāṃ prāyaśaḥ kṣemakarmaṇām|| 5

अर्थ

उनके केश, दाढ़ी-मूँछ और नखोंसे मेघ, बिजली, शिला एवं लोहा आदि धातुएँ तथा भुजाओंसे प्रायः संसारकी रक्षा करनेवाले लोकपाल प्रकट हुए हैं॥ ५॥✎ 1290 1291

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1290 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति, → निऋर्ऋति,
  • #1291 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति, → निर्ऋति,

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