बड़े भारी सरोवरमें महाबली ग्राहने गजेन्द्रका पैर पकड़ लिया। जब बहुत थककर वह घबरा गया, तब उसने अपनी सूँड़में कमल लेकर भगवान्को पुकारा—‘हे आदिपुरुष! हे समस्त लोकोंके स्वामी! हे श्रवणमात्रसे कल्याण करनेवाले!’॥ १५॥✎ 153154
अन्तःसरस्युरुबलेन पदे गृहीतो
ग्राहेण यूथपतिरम्बुजहस्त आर्तः।
आहेदमादिपुरुषाखिललोकनाथ
तीर्थश्रवः श्रवणमङ्गलनामधेय॥ १५
बड़े भारी सरोवरमें महाबली ग्राहने गजेन्द्रका पैर पकड़ लिया। जब बहुत थककर वह घबरा गया, तब उसने अपनी सूँड़में कमल लेकर भगवान्को पुकारा—‘हे आदिपुरुष! हे समस्त लोकोंके स्वामी! हे श्रवणमात्रसे कल्याण करनेवाले!’॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.7.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 211) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/7/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)