श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.7.15

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

अन्तःसरस्युरुबलेन पदे गृहीतो

ग्राहेण यूथपतिरम्बुजहस्त आर्तः।

आहेदमादिपुरुषाखिललोकनाथ

तीर्थश्रवः श्रवणमङ्गलनामधेय॥ १५

antaḥsarasyurubalena pade gṛhīto

grāheṇa yūthapatirambujahasta ārtaḥ|

āhedamādipuruṣākhilalokanātha

tīrthaśravaḥ śravaṇamaṅgalanāmadheya|| 15

अर्थ

बड़े भारी सरोवरमें महाबली ग्राहने गजेन्द्रका पैर पकड़ लिया। जब बहुत थककर वह घबरा गया, तब उसने अपनी सूँड़में कमल लेकर भगवान्‌को पुकारा—‘हे आदिपुरुष! हे समस्त लोकोंके स्वामी! हे श्रवणमात्रसे कल्याण करनेवाले!’॥ १५॥✎ 153 154

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #153 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #154 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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