श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.7.51

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

इदं भागवतं नाम यन्मे भगवतोदितम्।

संग्रहोऽयं विभूतीनां त्व१मेतद् विपुलीकुरु॥ ५१

idaṃ bhāgavataṃ nāma yanme bhagavatoditam|

saṃgraho'yaṃ vibhūtīnāṃ tvametad vipulīkuru|| 51

अर्थ

भगवान्‌ने मुझे जो उपदेश किया था, वह यही ‘भागवत’ है। इसमें भगवान्‌की विभूतियोंका संक्षिप्त वर्णन है। तुम इसका विस्तार करो॥ ५१॥✎ 161 162 163 164

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—तदेतद्।

    (मुद्रित पृष्ठ 218)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
  • #161 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #162 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #163 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #164 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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