श्रेणीनां राजर्षीणां च धर्मः कृच्छ्रेषु जीवताम्॥ १८
nṛṇāṃ sādhāraṇo dharmaḥ saviśeṣaśca yādṛśaḥ|
śreṇīnāṃ rājarṣīṇāṃ ca dharmaḥ kṛcchreṣu jīvatām|| 18
अर्थ
मनुष्योंके साधारण और विशेष धर्म कौन-कौन-से हैं? विभिन्न व्यवसायवाले लोगोंके, राजर्षियोंके और विपत्तिमें पड़े हुए लोगोंके धर्मका भी उपदेश कीजिये॥ १८॥✎ 167168
नृणां साधारणो धर्मः सविशेषश्च यादृशः।
श्रेणीनां राजर्षीणां च धर्मः कृच्छ्रेषु जीवताम्॥ १८
मनुष्योंके साधारण और विशेष धर्म कौन-कौन-से हैं? विभिन्न व्यवसायवाले लोगोंके, राजर्षियोंके और विपत्तिमें पड़े हुए लोगोंके धर्मका भी उपदेश कीजिये॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.8.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 220) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/8/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)