श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.8.28

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

प्राह भागवतं नाम पुराणं ब्रह्मसम्मितम्।

ब्रह्मणे भगवत्प्रोक्तं ब्रह्मकल्प उपागते॥ २८

prāha bhāgavataṃ nāma purāṇaṃ brahmasammitam|

brahmaṇe bhagavatproktaṃ brahmakalpa upāgate|| 28

अर्थ

उन्होंने उन्हें वही वेदतुल्य श्रीमद्भागवत-महापुराण सुनाया, जो ब्राह्मकल्पके आरम्भमें स्वयं भगवान्‌ने ब्रह्माजीको सुनाया था॥ २८॥✎ 169 170

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #169 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #170 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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