॥ श्रीहरिः ॥
तृतीय स्कन्ध
॥ श्रीगणेशायः नमः॥
श्रीमद्भागवतमहापुराणम्
तृतीय स्कन्धः
- 1अथ प्रथमोऽध्यायःउद्धव और विदुरकी भेंट45 श्लोक
पृष्ठ 234 - 2अथ द्वितीयोऽध्यायःउद्धवजीद्वारा भगवान्की बाललीलाओंका वर्णन34 श्लोक
पृष्ठ 241 - 3अथ तृतीयोऽध्यायःभगवान्के अन्य लीलाचरित्रोंका वर्णन28 श्लोक
पृष्ठ 245 - 4अथ चतुर्थोऽध्यायःउद्धवजीसे विदा होकर विदुरजीका मैत्रेय ऋषिके पास जाना36 श्लोक
पृष्ठ 249 - 5अथ पञ्चमोऽध्यायःविदुरजीका प्रश्न और मैत्रेयजीका सृष्टिक्रमवर्णन50 श्लोक
पृष्ठ 252 - 6अथ षष्ठोऽध्यायःविराट् शरीरकी उत्पत्ति40 श्लोक
पृष्ठ 258 - 7अथ सप्तमोऽध्यायःविदुरजीके प्रश्न42 श्लोक
पृष्ठ 263 - 8अथाष्टमोऽध्यायःब्रह्माजीकी उत्पत्ति33 श्लोक
पृष्ठ 267 - 9अथ नवमोऽध्यायःब्रह्माजीद्वारा भगवान्की स्तुति44 श्लोक
पृष्ठ 272 - 10अथ दशमोऽध्यायःदस प्रकारकी सृष्टिका वर्णन29 श्लोक
पृष्ठ 278 - 11अथैकादशोऽध्यायःमन्वन्तरादि कालविभागका वर्णन41 श्लोक
पृष्ठ 281 - 12अथ द्वादशोऽध्यायःसृष्टिका विस्तार56 श्लोक
पृष्ठ 286 - 13अथ त्रयोदशोऽध्यायःवाराह-अवतारकी कथा50 श्लोक
पृष्ठ 292 - 14अथ चतुर्दशोऽध्यायःदितिका गर्भधारण50 श्लोक
पृष्ठ 298 - 15अथ पञ्चदशोऽध्यायःजय-विजयको सनकादिका शाप50 श्लोक
पृष्ठ 304 - 16अथ षोडशोऽध्यायःजय-विजयका वैकुण्ठसे पतन37 श्लोक
पृष्ठ 312 - 17अथ सप्तदशोऽध्यायःहिरण्यकशिपु और हिरण्याक्षका जन्म तथा हिरण्याक्षकी दिग्विजय31 श्लोक
पृष्ठ 317 - 18अथाष्टादशोऽध्यायःहिरण्याक्षके साथ वराहभगवान्का युद्ध28 श्लोक
पृष्ठ 321 - 19अथैकोनविंशोऽध्यायःहिरण्याक्षवध38 श्लोक
पृष्ठ 324 - 20अथ विंशोऽध्यायःब्रह्माजीकी रची हुई अनेक प्रकारकी सृष्टिका वर्णन53 श्लोक
पृष्ठ 328 - 21अथैकविंशोऽध्यायःकर्दमजीकी तपस्या और भगवान्का वरदान56 श्लोक
पृष्ठ 334 - 22अथ द्वाविंशोऽध्यायःदेवहूतिके साथ कर्दम प्रजापतिका विवाह39 श्लोक
पृष्ठ 341 - 23अथ त्रयोविंशोऽध्यायःकर्दम और देवहूतिका विहार57 श्लोक
पृष्ठ 345 - 24अथ चतुर्विंशोऽध्यायःश्रीकपिलदेवजीका जन्म47 श्लोक
पृष्ठ 352 - 25अथ पञ्चविंशोऽध्यायःदेवहूतिका प्रश्न तथा भगवान् कपिलद्वारा भक्तियोगकी महिमाका वर्णन44 श्लोक
पृष्ठ 357 - 26अथ षड्विंशोऽध्यायःमहदादि भिन्न-भिन्न तत्त्वोंकी उत्पत्तिका वर्णन72 श्लोक
पृष्ठ 362 - 27अथ सप्तविंशोऽध्यायःप्रकृति-पुरुषके विवेकसे मोक्ष-प्राप्तिका वर्णन30 श्लोक
पृष्ठ 370 - 28अथाष्टाविंशोऽध्यायःअष्टांगयोगकी विधि44 श्लोक
पृष्ठ 372 - 29अथैकोनत्रिंशोऽध्यायःभक्तिका मर्म और कालकी महिमा45 श्लोक
पृष्ठ 380 - 30अथ त्रिंशोऽध्यायःदेह-गेहमें आसक्त पुरुषोंकी अधोगतिका वर्णन34 श्लोक
पृष्ठ 385 - 31अथैकत्रिंशोऽध्यायःमनुष्ययोनिको प्राप्त हुए जीवकी गतिका वर्णन48 श्लोक
पृष्ठ 388 - 32अथ द्वात्रिंशोऽध्यायःधूममार्ग और अर्चिरादि मार्गसे जानेवालोंकी गतिका और भक्तियोगकी उत्कृष्टताका वर्णन43 श्लोक
पृष्ठ 395 - 33अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्यायःदेवहूतिको तत्त्वज्ञान एवं मोक्षपदकी प्राप्ति37 श्लोक
पृष्ठ 400
॥ ॐ तत्सत्॥