श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.1.20

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

इति समभिहितो महाभागवतो भगवतः त्रिभुवनगुरोरनुशासनमात्मनो लघुतयावनतशिरोधरो बाढमिति सबहुमानमुवाह॥ २०॥

iti samabhihito mahābhāgavato bhagavataḥ tribhuvanaguroranuśāsanamātmano laghutayāvanataśirodharo bāḍhamiti sabahumānamuvāha|| 20||

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—जब त्रिलोकीके गुरु श्रीब्रह्माजीने इस प्रकार कहा, तो परमभागवत प्रियव्रतने छोटे होनेके कारण नम्रतासे सिर झुका लिया और ‘जो आज्ञा’ ऐसा कहकर बड़े आदरपूर्वक उनका आदेश शिरोधार्य किया॥ २०॥

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