विरजके विषयमें यह श्लोक प्रसिद्ध है—‘जिस प्रकार भगवान् विष्णु देवताओंकी शोभा बढ़ाते हैं, उसी प्रकार इस प्रियव्रतवंशको इसमें सबसे पीछे उत्पन्न हुए राजा विरजने अपने सुयशसे विभूषित किया था’॥ १६॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां पञ्चमस्कन्धे प्रियव्रतवंशानुकीर्तनं नाम पञ्चदशोऽध्यायः॥ १५॥
तत्रायं श्लोकः—
प्रैयव्रतं वंशमिमं विरजश्चरमोद्भवः।
अकरोदत्यलं कीर्त्या विष्णुः सुरगणं यथा॥ १६
विरजके विषयमें यह श्लोक प्रसिद्ध है—‘जिस प्रकार भगवान् विष्णु देवताओंकी शोभा बढ़ाते हैं, उसी प्रकार इस प्रियव्रतवंशको इसमें सबसे पीछे उत्पन्न हुए राजा विरजने अपने सुयशसे विभूषित किया था’॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.15.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 640) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/5/15/16/