इनके पवित्र और निर्मल जलका सेवन करनेवाले वहाँके पुरुष, ऋषभ, द्रविण और देवक नामक चार वर्णवाले निवासी जलसे भरी हुई अंजलिके द्वारा आपोदेवता (जलके देवता)-की उपासना करते हैं॥ २२॥
यासामम्भः पवित्रममलमुपयुञ्जानाः पुरुषऋषभद्रविणदेवकसंज्ञा वर्षपुरुषा आपोमयं देवमपां पूर्णेनाञ्जलिना यजन्ते॥ २२॥
इनके पवित्र और निर्मल जलका सेवन करनेवाले वहाँके पुरुष, ऋषभ, द्रविण और देवक नामक चार वर्णवाले निवासी जलसे भरी हुई अंजलिके द्वारा आपोदेवता (जलके देवता)-की उपासना करते हैं॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.20.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 665) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/5/20/22/