श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.20.27

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

तद्वर्षपुरुषा ऋतव्रतसत्यव्रतदानव्रतानुव्रतनामानो भगवन्तं वाय्वात्मकं प्राणायामविधूत रजस्तमसः परमसमाधिना यजन्ते॥ २७॥

tadvarṣapuruṣā ṛtavratasatyavratadānavratānuvratanāmāno bhagavantaṃ vāyvātmakaṃ prāṇāyāmavidhūta rajastamasaḥ paramasamādhinā yajante|| 27||

अर्थ

उस वर्षके ऋतव्रत, सत्यव्रत, दानव्रत और अनुव्रत नामक पुरुष प्राणायामद्वारा अपने रजोगुण-तमोगुणको क्षीण कर महान् समाधिके द्वारा वायुरूप श्रीहरिकी आराधना करते हैं॥ २७॥

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