ata ūrdhvamaṅgārako'pi yojanalakṣadvitaya upalabhyamānastribhistribhiḥ pakṣairekaikaśo rāśīndvādaśānubhuṅkte yadi na vakreṇābhivartate prāyeṇāśubhagraho'ghaśaṃsaḥ|| 14||
अर्थ
इससे दो लाख योजन ऊपर मंगल है। वह यदि वक्रगतिसे न चले तो, एक-एक राशिको तीन-तीन पक्षमें भोगता हुआ बारहों राशियोंको पार करता है। यह अशुभ ग्रह है और प्रायः अमंगलका सूचक है॥ १४॥
अत ऊर्ध्वमङ्गारकोऽपि योजनलक्षद्वितय उपलभ्यमानस्त्रिभिस्त्रिभिः पक्षैरेकैकशो राशीन्द्वादशानुभुङ्क्ते यदि न वक्रेणाभिवर्तते प्रायेणाशुभग्रहोऽघशंसः॥ १४॥
इससे दो लाख योजन ऊपर मंगल है। वह यदि वक्रगतिसे न चले तो, एक-एक राशिको तीन-तीन पक्षमें भोगता हुआ बारहों राशियोंको पार करता है। यह अशुभ ग्रह है और प्रायः अमंगलका सूचक है॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.22.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 673) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/5/22/14/