tata uttarasmādṛṣaya ekādaśalakṣayojanāntara upalabhyante ya eva lokānāṃ śamanubhāvayanto bhagavato viṣṇoryatparamaṃ padaṃ pradakṣiṇaṃ prakramanti|| 17||
अर्थ
इनके ऊपर ग्यारह लाख योजनकी दूरीपर कश्यपादि सप्तर्षि दिखायी देते हैं। ये सब लोकोंकी मंगल-कामना करते हुए भगवान् विष्णुके परम पद ध्रुवलोककी प्रदक्षिणा किया करते हैं॥ १७॥
तत उत्तरस्मादृषय एकादशलक्षयोजनान्तर उपलभ्यन्ते य एव लोकानां शमनुभावयन्तो भगवतो विष्णोर्यत्परमं पदं प्रदक्षिणं प्रक्रमन्ति॥ १७॥
इनके ऊपर ग्यारह लाख योजनकी दूरीपर कश्यपादि सप्तर्षि दिखायी देते हैं। ये सब लोकोंकी मंगल-कामना करते हुए भगवान् विष्णुके परम पद ध्रुवलोककी प्रदक्षिणा किया करते हैं॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.22.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 674) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/5/22/17/