yastviha vai sarvābhigamastamamutra niraye vartamānaṃ vajrakaṇṭakaśālmalīmāropya niṣkarṣanti|| 21||
अर्थ
जो पुरुष इस लोकमें पशु आदि सभीके साथ व्यभिचार करता है, उसे मृत्युके बाद यमदूत वज्रकण्टकशाल्मली नरकमें गिराते हैं और वज्रके समान कठोर काँटोंवाले सेमरके वृक्षपर चढ़ाकर फिर नीचेकी ओर खींचते हैं॥ २१॥
यस्त्विह वै सर्वाभिगमस्तममुत्र निरये वर्तमानं वज्रकण्टकशाल्मलीमारोप्य निष्कर्षन्ति॥ २१॥
जो पुरुष इस लोकमें पशु आदि सभीके साथ व्यभिचार करता है, उसे मृत्युके बाद यमदूत वज्रकण्टकशाल्मली नरकमें गिराते हैं और वज्रके समान कठोर काँटोंवाले सेमरके वृक्षपर चढ़ाकर फिर नीचेकी ओर खींचते हैं॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.26.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 690) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/5/26/21/