उनमें महायोगी भरतजी सबसे बड़े और सबसे अधिक गुणवान् थे। उन्हींके नामसे लोग इस अजनाभखण्डको ‘भारतवर्ष’ कहने लगे॥ ९॥✎ 440
येषां खलु महायोगी भरतो ज्येष्ठः श्रेष्ठगुण आसीद्येनेदं वर्षं भारतमिति व्यपदिशन्ति॥ ९॥
उनमें महायोगी भरतजी सबसे बड़े और सबसे अधिक गुणवान् थे। उन्हींके नामसे लोग इस अजनाभखण्डको ‘भारतवर्ष’ कहने लगे॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.4.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 592) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/5/4/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)