श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.4.9

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

येषां खलु महायोगी भरतो ज्येष्ठः श्रेष्ठगुण आसीद्येनेदं वर्षं भारतमिति व्यपदिशन्ति॥ ९॥ तमनु कुशावर्त इलावर्तो ब्रह्मावर्तो मलयः केतुर्भद्रसेन इन्द्रस्पृग्विदर्भः कीकट इति नव नवतिप्रधानाः॥ १०॥

yeṣāṃ khalu mahāyogī bharato jyeṣṭhaḥ śreṣṭhaguṇa āsīdyenedaṃ varṣaṃ bhāratamiti vyapadiśanti|| 9||

अर्थ

उनमें महायोगी भरतजी सबसे बड़े और सबसे अधिक गुणवान् थे। उन्हींके नामसे लोग इस अजनाभखण्डको ‘भारतवर्ष’ कहने लगे॥ ९॥✎ 440

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #440 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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