श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.34

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

सर्वे पद्मपलाशाक्षाः पीतकौशेयवाससः।

किरीटिनः कुण्डलिनो लसत्पुष्करमालिनः॥ ३४

sarve padmapalāśākṣāḥ pītakauśeyavāsasaḥ|

kirīṭinaḥ kuṇḍalino lasatpuṣkaramālinaḥ|| 34

अर्थ

हम देखते हैं कि तुम सब लोगोंके नेत्र कमलदलके समान कोमलतासे भरे हैं, तुम पीले-पीले रेशमी वस्त्र पहने हो, तुम्हारे सिरपर मुकुट, कानोंमें कुण्डल और गलोंमें कमलके हार लहरा रहे हैं॥ ३४॥

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