श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.38

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

विष्णुदूता ऊचुः

यूयं वै धर्मराजस्य यदि निर्देशकारिणः।

ब्रूत धर्मस्य नस्तत्त्वं यच्च धर्मस्य लक्षणम्॥ ३८

yūyaṃ vai dharmarājasya yadi nirdeśakāriṇaḥ|

brūta dharmasya nastattvaṃ yacca dharmasya lakṣaṇam|| 38

अर्थ

भगवान्‌के पार्षदोंने कहा—यमदूतो! यदि तुमलोग सचमुच धर्मराजके आज्ञाकारी हो तो हमें धर्मका लक्षण और धर्मका तत्त्व सुनाओ॥ ३८॥

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