श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.68

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तत एनं दण्डपाणेः सकाशं कृतकिल्बिषम्।

नेष्यामोऽकृतनिर्वेशं यत्र दण्डेन शुद्ध्यति॥ ६८

tata enaṃ daṇḍapāṇeḥ sakāśaṃ kṛtakilbiṣam|

neṣyāmo'kṛtanirveśaṃ yatra daṇḍena śuddhyati|| 68

अर्थ

इसने अबतक अपने पापोंका कोई प्रायश्चित्त भी नहीं किया है। इसलिये अब हम इस पापीको दण्डपाणि भगवान् यमराजके पास ले जायँगे। वहाँ यह अपने पापोंका दण्ड भोगकर शुद्ध हो जायगा॥ ६८॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां षष्ठस्कन्धेऽजामिलोपाख्याने प्रथमोऽध्यायः ॥ १॥

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