श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! अथर्ववेदी महर्षि दधीचिने ऐसा निश्चय करके अपनेको परब्रह्म परमात्मा श्रीभगवान्में लीन करके अपना स्थूल शरीर त्याग दिया॥ ११॥✎ 524525
एवं कृतव्यवसितो दध्यङ्ङाथर्वणस्तनुम्।
परे भगवति ब्रह्मण्यात्मानं सन्नयञ्जहौ॥ ११
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! अथर्ववेदी महर्षि दधीचिने ऐसा निश्चय करके अपनेको परब्रह्म परमात्मा श्रीभगवान्में लीन करके अपना स्थूल शरीर त्याग दिया॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.10.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 754) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/10/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)