॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.10.22
अभ्यर्दयन्नसंभ्रान्ताः सिंहनादेन दुर्मदाः।
गदाभिः परिघैर्बाणैः प्रासमुद्गरतोमरैः॥ २२
abhyardayannasaṃbhrāntāḥ siṃhanādena durmadāḥ|
gadābhiḥ parighairbāṇaiḥ prāsamudgaratomaraiḥ|| 22
अर्थ
वे घमंडी असुर सिंहनाद करते हुए बड़ी सावधानीसे देवसेनापर प्रहार करने लगे। उन लोगोंने गदा, परिघ, बाण, प्रास, मुद्गर, तोमर, शूल, फरसे, तलवार, शतघ्नी (तोप), भुशुण्डि आदि अस्त्र-शस्त्रोंकी बौछारसे देवताओंको सब ओरसे ढक दिया॥ २२-२३॥