परीक्षित्! वह शस्त्रों और अस्त्रोंकी वर्षा देवसैनिकोंको छूतक न सकी। उन्होंने अपने हस्तलाघवसे आकाशमें ही उनके हजार-हजार टुकड़े कर दिये॥ २५॥
न ते शस्त्रास्त्रवर्षौघा ह्यासेदुः सुरसैनिकान्।
छिन्नाः सिद्धपथे देवैर्लघुहस्तैः सहस्रधा॥ २५
परीक्षित्! वह शस्त्रों और अस्त्रोंकी वर्षा देवसैनिकोंको छूतक न सकी। उन्होंने अपने हस्तलाघवसे आकाशमें ही उनके हजार-हजार टुकड़े कर दिये॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.10.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 755) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/10/25/