श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.10.9

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

एतावानव्ययो धर्मः पुण्यश्लोकैरुपासितः।

यो भूतशोकहर्षाभ्यामात्मा शोचति हृष्यति॥ ९

etāvānavyayo dharmaḥ puṇyaślokairupāsitaḥ|

yo bhūtaśokaharṣābhyāmātmā śocati hṛṣyati|| 9

अर्थ

बड़े-बड़े महात्माओंने इस अविनाशी धर्मकी उपासना की है। उसका स्वरूप बस, इतना ही है कि मनुष्य किसी भी प्राणीके दुःखमें दुःखका अनुभव करे और सुखमें सुखका॥ ९॥

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