श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.12.11

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

पुरुषः प्रकृतिर्व्यक्तमात्मा भूतेन्द्रियाशयाः।

शक्नुवन्त्यस्य सर्गादौ न विना यदनुग्रहात्॥ ११

puruṣaḥ prakṛtirvyaktamātmā bhūtendriyāśayāḥ|

śaknuvantyasya sargādau na vinā yadanugrahāt|| 11

अर्थ

भगवान्‌के कृपा-प्रसादके बिना पुरुष, प्रकृति, महत्तत्त्व, अहंकार, पंचभूत, इन्द्रियाँ और अन्तःकरण-चतुष्टय—ये कोई भी इस विश्‍वकी उत्पत्ति आदि करनेमें समर्थ नहीं हो सकते॥ ११॥

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