उन्होंने अपने वज्रसे उसकी कोख फाड़ डाली और उसके पेटसे निकलकर बड़े वेगसे उसका पर्वत-शिखरके समान ऊँचा सिर काट डाला॥ ३२॥✎ 1950
भित्त्वा वज्रेण तत्कुक्षिं निष्क्रम्य बलभिद् विभुः।
उच्चकर्त शिरः शत्रोर्गिरिशृंगमिवौजसा॥ ३२
उन्होंने अपने वज्रसे उसकी कोख फाड़ डाली और उसके पेटसे निकलकर बड़े वेगसे उसका पर्वत-शिखरके समान ऊँचा सिर काट डाला॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.12.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 764) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/12/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1950 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): उँचा → ऊँचा