॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.13.2
देवर्षिपितृभूतानि दैत्या देवानुगाः स्वयम्।
प्रतिजग्मुःस्वधिष्ण्यानि ब्रह्मेशेन्द्रादयस्ततः॥ २
devarṣipitṛbhūtāni daityā devānugāḥ svayam|
pratijagmuḥsvadhiṣṇyāni brahmeśendrādayastataḥ|| 2
अर्थ
युद्ध समाप्त होनेपर देवता, ऋषि, पितर, भूत, दैत्य और देवताओंके अनुचर गन्धर्व आदि इन्द्रसे बिना पूछे ही अपने-अपने लोकको लौट गये। इसके पश्चात् ब्रह्मा, शंकर और इन्द्र आदि भी चले गये॥ २॥