श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.13.23

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

पठेयुराख्यानमिदं सदा बुधाः

शृण्वन्त्यथो पर्वणि पर्वणीन्द्रियम्।

धन्यं यशस्यं निखिलाघमोचनं

रिपुञ्जयं स्वस्त्ययनं तथाऽऽयुषम्॥ २३

paṭheyurākhyānamidaṃ sadā budhāḥ

śṛṇvantyatho parvaṇi parvaṇīndriyam|

dhanyaṃ yaśasyaṃ nikhilāghamocanaṃ

ripuñjayaṃ svastyayanaṃ tathā''yuṣam|| 23

अर्थ

बुद्धिमान् पुरुषोंको चाहिये कि वे इस इन्द्रसम्बन्धी आख्यानको सदा-सर्वदा पढ़ें और सुनें। विशेषतः पर्वोंके अवसरपर तो अवश्य ही इसका सेवन करें। यह धन और यशको बढ़ाता है, सारे पापोंसे छुड़ाता है, शत्रुपर विजय प्राप्त कराता है, तथा आयु और मंगलकी अभिवृद्धि करता है॥ २३॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां षष्ठस्कन्धे
इन्द्रविजयो नाम त्रयोदशोऽध्यायः
॥ १३॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें