प्राचीन कालकी बात है, शूरसेन देशमें चक्रवर्ती सम्राट् महाराज चित्रकेतु राज्य करते थे। उनके राज्यमें पृथ्वी स्वयं ही प्रजाकी इच्छाके अनुसार अन्न-रस दे दिया करती थी॥ १०॥
आसीद्राजा सार्वभौमः शूरसेनेषु वै नृप।
चित्रकेतुरिति ख्यातो यस्यासीत् कामधुङ्मही॥ १०
प्राचीन कालकी बात है, शूरसेन देशमें चक्रवर्ती सम्राट् महाराज चित्रकेतु राज्य करते थे। उनके राज्यमें पृथ्वी स्वयं ही प्रजाकी इच्छाके अनुसार अन्न-रस दे दिया करती थी॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 769) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/14/10/