॥ श्रीहरिः ॥
तस्या अनुदिनं गर्भः शुक्लपक्ष इवोडुपः।
ववृधे शूरसेनेशतेजसा शनकैर्नृप॥ ३१
tasyā anudinaṃ garbhaḥ śuklapakṣa ivoḍupaḥ|
vavṛdhe śūraseneśatejasā śanakairnṛpa|| 31
अर्थ
राजन्! शूरसेन देशके राजा चित्रकेतुके तेजसे कृतद्युतिका गर्भ शुक्लपक्षके चन्द्रमाके समान दिनोंदिन क्रमशः बढ़ने लगा॥ ३१॥
तस्या अनुदिनं गर्भः शुक्लपक्ष इवोडुपः।
ववृधे शूरसेनेशतेजसा शनकैर्नृप॥ ३१
राजन्! शूरसेन देशके राजा चित्रकेतुके तेजसे कृतद्युतिका गर्भ शुक्लपक्षके चन्द्रमाके समान दिनोंदिन क्रमशः बढ़ने लगा॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 771) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/14/31/