॥ श्रीहरिः ॥
पपात भूमौ परिवृद्धया शुचा
मुमोह विभ्रष्टशिरोरुहाम्बरा॥ ४८
papāta bhūmau parivṛddhayā śucā
mumoha vibhraṣṭaśiroruhāmbarā|| 48
अर्थ
तब वे अत्यन्त शोकके कारण मूर्च्छित होकर पृथ्वीपर गिर पड़ीं। उनके सिरके बाल बिखर गये और शरीरपरके वस्त्र अस्त-व्यस्त हो गये॥ ४८॥
पपात भूमौ परिवृद्धया शुचा
मुमोह विभ्रष्टशिरोरुहाम्बरा॥ ४८
तब वे अत्यन्त शोकके कारण मूर्च्छित होकर पृथ्वीपर गिर पड़ीं। उनके सिरके बाल बिखर गये और शरीरपरके वस्त्र अस्त-व्यस्त हो गये॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 773) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/14/48/