सूतजी कहते हैं—शौनकादि ऋषियो! भगवान् शुकदेवजीने परम श्रद्धालु राजर्षि परीक्षित्का यह श्रेष्ठ प्रश्न सुनकर उनका अभिनन्दन करते हुए यह बात कही॥ ८॥
परीक्षितोऽथ संप्रश्नं भगवान् बादरायणिः।
निशम्य श्रद्दधानस्य प्रतिनन्द्य वचोऽब्रवीत्॥ ८
सूतजी कहते हैं—शौनकादि ऋषियो! भगवान् शुकदेवजीने परम श्रद्धालु राजर्षि परीक्षित्का यह श्रेष्ठ प्रश्न सुनकर उनका अभिनन्दन करते हुए यह बात कही॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 768) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/14/8/