श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.15.4

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

यथा धानासु वै धाना भवन्ति न भवन्ति च।

एवं भूतेषु भूतानि चोदितानीशमायया॥ ४

yathā dhānāsu vai dhānā bhavanti na bhavanti ca|

evaṃ bhūteṣu bhūtāni coditānīśamāyayā|| 4

अर्थ

राजन्! जैसे कुछ बीजोंसे दूसरे बीज उत्पन्‍न होते और नष्ट हो जाते हैं, वैसे ही भगवान्‌की मायासे प्रेरित होकर प्राणियोंसे अन्य प्राणी उत्पन्‍न होते और नष्ट हो जाते हैं॥ ४॥✎ 541

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #541 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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