श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.16.64

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

त्वमेतच्छ्रद्धया राजन्‍नप्रमत्तो वचो मम।

ज्ञानविज्ञानसम्पन्‍नो धारयन्‍नाशु सिध्यसि॥ ६४

tvametacchraddhayā rājannapramatto vaco mama|

jñānavijñānasampanno dhārayannāśu sidhyasi|| 64

अर्थ

राजन्! यदि तुम मेरे इस उपदेशको सावधान होकर श्रद्धाभावसे धारण करोगे तो ज्ञान एवं विज्ञानसे सम्पन्‍न होकर शीघ्र ही सिद्ध हो जाओगे॥ ६४॥

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