राजन्! यदि तुम मेरे इस उपदेशको सावधान होकर श्रद्धाभावसे धारण करोगे तो ज्ञान एवं विज्ञानसे सम्पन्न होकर शीघ्र ही सिद्ध हो जाओगे॥ ६४॥
त्वमेतच्छ्रद्धया राजन्नप्रमत्तो वचो मम।
ज्ञानविज्ञानसम्पन्नो धारयन्नाशु सिध्यसि॥ ६४
राजन्! यदि तुम मेरे इस उपदेशको सावधान होकर श्रद्धाभावसे धारण करोगे तो ज्ञान एवं विज्ञानसे सम्पन्न होकर शीघ्र ही सिद्ध हो जाओगे॥ ६४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.16.64 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 786) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/16/64/