श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.17.4

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

एकदा स१ विमानेन विष्णुदत्तेन भास्वता।

गिरिशं ददृशे गच्छन् परीतं सिद्धचारणैः॥ ४

ekadā sa vimānena viṣṇudattena bhāsvatā|

giriśaṃ dadṛśe gacchan parītaṃ siddhacāraṇaiḥ|| 4

अर्थ

एक दिन चित्रकेतु भगवान्‌के दिये हुए तेजोमय विमानपर सवार होकर कहीं जा रहे थे। इसी समय उन्होंने देखा कि भगवान् शङ्कर बड़े-बड़े मुनियोंकी सभामें सिद्ध-चारणोंके बीच बैठे हुए हैं और साथ ही भगवती पार्वतीको अपनी गोदमें बैठाकर एक हाथसे उन्हें आलिंगन किये हुए हैं, यह देखकर चित्रकेतु विमानपर चढ़े हुए ही उनके पास चले गये और भगवती पार्वतीको सुना-सुनाकर जोरसे हँसने और कहने लगे॥ ४-५॥

यह अर्थ श्लोक 4–5 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—स्ववि०।

    (मुद्रित पृष्ठ 787)

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