जो पुरुष प्रातःकाल उठकर मौन रहकर श्रद्धाके साथ भगवान्का स्मरण करते हुए इस इतिहासका पाठ करता है, उसे परमगतिकी प्राप्ति होती है॥ ४१॥✎ 549
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां षष्ठस्कन्धे चित्रकेतुशापो नाम सप्तदशोऽध्यायः॥ १७॥
य एतत्प्रातरुत्थाय श्रद्धया वाग्यतः पठेत्।
इतिहासं हरिं स्मृत्वा स याति परमां गतिम्॥ ४१
जो पुरुष प्रातःकाल उठकर मौन रहकर श्रद्धाके साथ भगवान्का स्मरण करते हुए इस इतिहासका पाठ करता है, उसे परमगतिकी प्राप्ति होती है॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.17.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 791) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/17/41/