श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.29

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

एवं स्त्रिया जडीभूतो विद्वानपि विदग्धया।

बाढमित्याह विवशो न तच्चित्रं हि योषिति॥ २९

evaṃ striyā jaḍībhūto vidvānapi vidagdhayā|

bāḍhamityāha vivaśo na taccitraṃ hi yoṣiti|| 29

अर्थ

कश्यपजी महाराज बड़े विद्वान् और विचारवान् होनेपर भी चतुर दितिकी सेवासे मोहित हो गये और उन्होंने विवश होकर यह स्वीकार कर लिया कि ‘मैं तुम्हारी इच्छा पूर्ण करूँगा।’ स्त्रियोंके सम्बन्धमें यह कोई आश्‍चर्यकी बात नहीं है॥ २९॥

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