श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.36

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

सोऽहं त्वयार्चितो भद्रे ईदृग्भावेन भक्तितः।

तत्ते सम्पादये काममसतीनां सुदुर्लभम्॥ ३६

so'haṃ tvayārcito bhadre īdṛgbhāvena bhaktitaḥ|

tatte sampādaye kāmamasatīnāṃ sudurlabham|| 36

अर्थ

कल्याणी! तुमने बड़े प्रेमभावसे, भक्तिसे मेरी वैसी ही पूजा की है। अब मैं तुम्हारी सब अभिलाषाएँ पूर्ण कर दूँगा। असतियोंके जीवनमें ऐसा होना अत्यन्त दुर्लभ है॥ ३६॥✎ 551

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #551 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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