श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.52

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

धौतवासाः शुचिर्नित्यं सर्वमङ्गलसंयुता।

पूजयेत्प्रातराशात्प्राग्गोविप्रान् श्रियमच्युतम्॥ ५२

dhautavāsāḥ śucirnityaṃ sarvamaṅgalasaṃyutā|

pūjayetprātarāśātprāggoviprān śriyamacyutam|| 52

अर्थ

इस प्रकार इन निषिद्ध कर्मोंका त्याग करके सर्वदा पवित्र रहे, धुला वस्त्र धारण करे और सभी सौभाग्यके चिह्नोंसे सुसज्जित रहे। प्रातःकाल कलेवा करनेके पहले ही गाय, ब्राह्मण, लक्ष्मीजी और भगवान् नारायणकी पूजा करे॥ ५२॥

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