श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.69

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अथेन्द्रमाह ताताहमादित्यानां भयावहम्।

अपत्यमिच्छन्त्यचरं व्रतमेतत्सुदुष्करम्॥ ६९

athendramāha tātāhamādityānāṃ bhayāvaham|

apatyamicchantyacaraṃ vratametatsuduṣkaram|| 69

अर्थ

उसने इन्द्रको सम्बोधन करके कहा—‘बेटा! मैं इस इच्छासे इस अत्यन्त कठिन व्रतका पालन कर रही थी कि तुम अदितिके पुत्रोंको भयभीत करनेवाला पुत्र उत्पन्‍न हो॥ ६९॥✎ 553

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #553 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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