यह परम आश्चर्यमयी घटना देखकर मैंने ऐसा निश्चय किया कि परमपुरुष भगवान्की उपासनाकी यह कोई स्वाभाविक सिद्धि है॥ ७३॥✎ 554555
ततस्तत्परमाश्चर्यं वीक्ष्याध्यवसितं मया।
महापुरुषपूजायाः सिद्धिः काप्यनुषङ्गिणी॥ ७३
यह परम आश्चर्यमयी घटना देखकर मैंने ऐसा निश्चय किया कि परमपुरुष भगवान्की उपासनाकी यह कोई स्वाभाविक सिद्धि है॥ ७३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.73 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 800) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/18/73/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)