marudbhiḥ saha tāṃ natvā jagāma tridivaṃ prabhuḥ|| 77
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! दिति देवराज इन्द्रके शुद्धभावसे सन्तुष्ट हो गयी। उससे आज्ञा लेकर देवराज इन्द्रने मरुद्गणोंके साथ उसे नमस्कार किया और स्वर्गमें चले गये॥ ७७॥
इन्द्रस्तयाभ्यनुज्ञातः शुद्धभावेन तुष्टया।
मरुद्भिः सह तां नत्वा जगाम त्रिदिवं प्रभुः॥ ७७
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! दिति देवराज इन्द्रके शुद्धभावसे सन्तुष्ट हो गयी। उससे आज्ञा लेकर देवराज इन्द्रने मरुद्गणोंके साथ उसे नमस्कार किया और स्वर्गमें चले गये॥ ७७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.77 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 800) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/18/77/