प्रभो! आप ही इन महामायाके अधीश्वर हैं और आप ही स्वयं परमपुरुष हैं। आप समस्त यज्ञ हैं और ये हैं यज्ञ-क्रिया। आप फलके भोक्ता हैं और ये हैं उसको उत्पन्न करनेवाली क्रिया॥ १२॥
तस्या अधीश्वरः साक्षात्त्वमेव पुरुषः परः।
त्वं सर्वयज्ञ इज्येयं क्रियेयं फलभुग्भवान्॥ १२
प्रभो! आप ही इन महामायाके अधीश्वर हैं और आप ही स्वयं परमपुरुष हैं। आप समस्त यज्ञ हैं और ये हैं यज्ञ-क्रिया। आप फलके भोक्ता हैं और ये हैं उसको उत्पन्न करनेवाली क्रिया॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.19.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 802) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/19/12/